महुआ

अशोक लखनऊ के पास के गाँव का एक गठीले बदन वाला कड़ियल जवान है उसका कपड़ों का थोक का व्यापार लखनऊ कानपुर के आस पास के छोटे छोटे शहरों कस्बों और गाँवों के फुटकर व्यापारियों में फैला है जिसे वो लखनऊ में रहकर चलाता है। उसे अक्सर व्यापार के सिलसिले में शहरों कस्बों और गाँवों में आना जाना पड़ता है. इसीलिए उसे अक्सर रात में भी यहाँ वहाँ रुकना पड़ता है। शादी से पहले अपनी जिस्मानी जरुरतों को पूरा करने के लिए वो यहाँ वहाँ बदमाश लडकियों, औरतों में मुंह मार लेता था, पर धीरे धीरे उसकी प्रचंड काम शक्ति(चोदने कि ताकत) और हथियार (लंड) के आकार की वजह से बड़ी से बड़ी चुदक्कड़ बदमाश लड़की या औरत यहाँ तक की रंडियां भी एक बार के बाद उसके पास आने से घबराने लगीं । दरअसल उसका लंड करीब नाइसिल पावडर के डिब्बे के जितना लम्बा और मोटा था और वो इतनी ज्यादा देर में झड़ता की जो एक बार चुदवा लेती थी वो दोबारा उसके पास भी नहीं फटकती थीं धीरे धीरे वो इतना बदनाम हो गया की जब वो रात में किसी शहर गांव में रुकता तो उसे यूँही (जांघों के बीच लंड दबा के) सोना पड़ता क्योंकि सब औरते उसके बारे में जान गयीं थीं.

पर इसी बीच बिल्ली के भाग्य से छींका टूटा अशोक पास के एक कस्बे में व्यापार के सिलसिले में गया था वहां के फुटकर व्यापारियों से हिसाब किताब करते रात हो गयी तो उन लोगो ने पड़ोस की एक विधवा अधेड़ औरत चम्पा से गुजारिश करके उसके यहाँ अशोक के रुकने का इंतजाम कर दिया. ये विधवा किसी दूर के गाँव से, अपनी जवान खुबसूरत गदराई भतीजी महुआ जिसके माँ बाप कुछ धनदौलत छोड़ गए थे उसे बेचबांच के ये मकान लेकर रहने के लिए आई थी. अतः ये लोग अशोक की असलियत नहीं जानते थे अशोक को महुआ पसंद आ गई और उसने चम्पा से उसका हाथ मांग लिया और दोनों का विवाह हो गया। सुहागरात को अशोक ने दुलहन का घूँघट उठाया महुआ की खूबसूरती देख उसके मुंह से निकला “सुभान अल्लाह ! मुझे क्या पता था की मेरी किस्मत इतनी अच्छी है।” ऐसा कहते हुए अशोक ने अपने होंठ उसके मदभरे गुलाबी होठों पर रख दिये। महुआ को चूमते समय उसके बेल से स्तन अशोक के चौड़े सीने पर पूरी तरह दब गये थे वो उसके निप्पल अपने सीने पर महसूस कर रहा था ।

Comments